अमरकंटक दार्शनिक स्थल | नर्मदा कुंड, जैन मंदिर, अमरेश्वर महादेव मंदिर |
भारत में कई धार्मिक स्थल हैं जिनकी अपनी-अपनी मान्यताएं हैं | उसमें से एक धार्मिक स्थल अमरकंटक है | अमरकंटक धार्मिक और दार्शनिक स्थल है | आइए जानते हैं अमरकंटक के बारे में |
अमरकंटक भारत के राज्य मध्य प्रदेश में स्थित है | मध्य प्रदेश में बसा अमरकंटक बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन है | अमरकंटक मंदिर मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित है | अमरकंटक में नर्मदा नदी का उद्गम हुआ है | अमरकंटक में विशाल मंदिर है जो काफी खूबसूरत है और मनमोहक है |
अमरकंटक के मंदिरों को घूमने और देखने के लिए हजारों लोग हर साल वहां जाते हैं | अमरकंटक में 24 मंदिर हैं और मंदिरों के बीच है नर्मदा कुंड जहां से मां नर्मदा निकलती है | अमरकंटक में भगवान शंकर की शिवलिंग की पूजा की जाती है | यहां भगवान शिव का भव्य मंदिर है | लोग अमरकंटक भगवान शिव की पूजा अर्चना और दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं |
कहा जाता है अमरकंटक में स्थित भगवान शंकर के अमरेश्वर महादेव मंदिर का दर्शन करने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है | महादेव की इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन से जीवन के कष्ट मिट जाते हैं | अमरेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना आठवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी | पुरानी मान्यता के अनुसार इस जगह बहुत ज्यादा बांस के पेड़ थे | इस कारण इस मंदिर को बांस ईश्वर महादेव मंदिर भी कहा जाता है |
अमरकंटक में नर्मदा कुंड का पानी काफी साफ है | इस पानी में मंदिरों की परछाई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है | यही भगवान शंकर के साथ मां नर्मदा और बहुत से देवी-देवताओं की मूर्ति है जिनकी पूजा अर्चना रोज प्रातः और संध्या काल में की जाती है | अमरकंटक में यात्रियों के रुकने के लिए कई आश्रम है | अमरकंटक के चारों ओर बहुत से मंदिर स्थित है |
इन मंदिरों में शिव मंदिर, नर्मदा मंदिर, गणेश मंदिर, कार्तिकेय मंदिर, राम जानकी मंदिर, सोनाक्षी मंदिर, गोरखनाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, कृष्ण मंदिर इसके अलावा अमरकंटक में रूद्र मंदिर भी हैं | अमरकंटक के मंदिर परिसर में एक हाथी की मूर्ति है | यहां की मान्यता है कि जो भी इस हाथी की मूर्ति के पैरों के बीच से होकर निकलता है उसे भगवान शिव का आशीष प्राप्त होता है | उसकी कष्ट दुख मिट जाते हैं |अमरकंटक का यह स्थल काफी लुभावना है |
अमरकंटक में दार्शनिक स्थल
आइए जानते हैं अमरकंटक के कुछ दार्शनिक स्थलों के बारे में |
ज्वालेश्वर धाम
ज्वालेश्वर धाम आल्हा नदी का उद्गम स्थल है |ज्वालेश्वर मंदिर अमरकंटक से 8 किलोमीटर दूर शहडोल में स्थित है | यहां भगवान शंकर का शिवलिंग स्थित है | अजमेर गढ़ की जगह में बहुत ही सुंदर वादियां है जहां घूमने से मन शांत लगता है |
दुर्गा धारा जलप्रपात
यह जलप्रपात अमरकंटक जाने वाले मार्ग पर स्थित है | दुर्गा धारा जलप्रपात का दृश्य बहुत ही आकर्षक है | यहां मां दुर्गा की मंदिर है |
जैन मंदिर
अमरकंटक का जैन मंदिर बहुत ही चर्चित मंदिर है | इस मंदिर में भगवान बुद्ध की प्रतिमा है | इस मंदिर का निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है | जैन मंदिर काफी बड़ा और भव्य है | इस मंदिर की दीवारें, स्तंभ में प्राचीन कलाकृतियां देखने को मिलती है जो हमारे प्राचीन कला कृति सभ्यता को दर्शाती है | जैन मंदिर का निर्माण कार्य बहुत समय से किया जा रहा है |
नर्मदा मंदिर
अमरकंटक मंदिर परिसर में नर्मदा माता का मंदिर है | मां नर्मदा का मंदिर सुबह 6:00 बजे खुलता है और शाम 8:00 बजे बंद होता है |
कलचुरी काल मंदिर
कहा जाता है कि यह जो मंदिर है वह बहुत समय से है | इस जगह एक साथ बहुत से मंदिर है जिनमें कर्ण मंदिर, मच्छेन्द्रनाथ मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर और केशव नारायण मंदिर है | इन मंदिरों के पास एक कुंड है | इस जगह के चारों ओर का वातावरण काफी मनमोहक है | यह मंदिर मुख्य मंदिर के दक्षिण में स्थित है|
सोनमुड़ा
सोनमुड़ा में सोनभद्र नदी का उद्गम स्थल है | यह स्थल दर्शनीय और खूबसूरत है | यह नदी ऊंची पहाड़ी से गिरती है |
माई का बगिया
यहां माना जाता है कि इस जगह नर्मदा मां बाल रूप में खेला करती थी | इस जगह माता का मंदिर है जिसे माई का बगिया कहा जाता है |
श्री यंत्र मंदिर
श्री यंत्र मंदिर बहुत ही खूबसूरत नजारा प्रदर्शित करता है | यह मंदिर एक गोलाकार घेरे के अंदर है | बाहर इस मंदिर का प्रवेश द्वार है | इस मंदिर का निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है |
कपिलधारा
कपिलधारा, नर्मदा कुंड से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित है | यह धारा पहाड़ी से नीचे गिरती है |
कबीर चबूतरा
कहा जाता है कि इस जगह कबीर ने तपस्या की थी | इसलिए इस जगह को कबीर चबूतरा कहा जाता है |
मृत्युंजय आश्रम
यह आश्रम नर्मदा उद्गम मंदिर के पास है | यह एक विश्रामगृह है | यहां लोग विश्राम करने के लिए ठहरते हैं |
भृगु कमंडल
यह जगह नर्मदा कुंड से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | पुरानी मान्यता है कि इस जगह भृगु ऋषि ने तपस्या की थी |
अमरेश्वर महादेव मंदिर
अमरेश्वर महादेव मंदिर अमरकंटक से 15 किलोमीटर दूर स्थित है | इस मंदिर में 11 फीट ऊंचा शिवलिंग है जो अमरकंटक का मुख्य महादेव का भव्य मंदिर है | जहां भगवान अमरेश्वर महादेव स्थित है | इस मंदिर में भगवान शंकर की 51 टन वजनी शिवलिंग स्थित है |
त्रिमुखी मंदिर
त्रिमुखी मंदिर पहाड़ी पर स्थित है | इस मंदिर में भगवान शंकर का शिवलिंग रूप में मूर्ति विराजित है |
शक्ति पीठ मंदिर
यह मंदिर सोनाक्षी मंदिर के नाम से जाना जाता है | यह सोन नदी के पास है | यहां सोनाक्षी देवी की पूजा की जाती है |
चंडीका गुफा
चंडीका गुफा में पहुंचना काफी मुश्किल है | कहा जाता है कि यह गुफा तप के लिए था |
अमरकंटक में कई और भी दर्शनी और धार्मिक स्थल है माई का मड़वा, चक्रतीर्थ, विनायक मंदिर, श्री गणेश मंदिर आदि |