कल्कि अवतार कब होगा | भगवान विष्णु का कलयुग में 10वां अवतार |


कल्कि अवतार | भगवान विष्णु का कलयुग 10वां में अवतार | पूरी जानकारी |

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धार्मिक पुराणों और कथाओं में वर्णन है कि भगवान ब्रह्मा इस जगत के रचयिता है, भगवान विष्णु इस जगत के पालनहार और भगवान शंकर इस जगत के विनाश कर्ता है | हमारे पुराणों में लिखा है कि जब जब इस संसार में पाप, दुराचार अधिक हुआ है तब-तब भगवान विष्णु जगत कल्याण और इस संसार की रक्षा करने के लिए अवतरित हुए है । 

सतयुग में पाप और अधर्म ज्यादा हो गया था तब भगवान विष्णु सतयुग के अंत समय में श्री राम के रूप में इस जगत में अवतरित हुए थे और भगवान श्रीराम ने पाप और अधर्म का नाश करके सारे संसार में सत्य और धर्म की स्थापना की थी | द्वापर युग में भी जब अधर्म ज्यादा बढ़ गया था तब भी जगत के पालन कर्ता भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण के रूप में अवतरित हुए थे और इस जगत से पाप और अधर्म का नाश किया था ।आज हम आपको भगवान विष्णु के कलयुग में होने वाले कल्कि अवतार के बारें में बताने जा रहे हैं |

धार्मिक पुराणों और कथाओं  में वर्णन है कि कलयुग में  जब पाप और अधर्म बहुत बढ़ जाएगा, अधर्म धर्म को क्षति पहुंचाएगा, सारे जगत में हाहाकार मच जाएगा, सत्य की जगह असत्य, अधर्म, पाप अधिक बढ़ जाएगा, तब भगवान विष्णु कलयुग में भगवान कल्कि के रूप में अवतरित होंगे | भगवान विष्णु का यह अवतार दिव्य होगा | कल्कि अवतार से भगवान विष्णु कलयुग से पाप, असत्य, अधर्म का नाश करेंगे और धर्म सत्य की स्थापना कर इस जगत की रक्षा करेंगे | भगवान नारायण के इस अवतार से कलयुग का अंत होगा | भगवान विष्णु के इस दिव्य अवतार के बारे में श्रीमद् भागवत पुराण में वर्णन है|

श्रीमद् भागवत  पुराण के द्वादश स्कंध अध्याय 2 में घोर कलयुग के बारे में वर्णन है | कलयुग का अंत होते-होते मनुष्य गधो के समान हो जाएंगे, मनुष् लोभ से  पूर्ण असत्य वाणी और अधर्म के रास्ते पर चलने वाले हो जाएंगे और मनुष्य के कृत्यों से चारों ओर पाप और अधर्म फैल जाएगा |मनुष्य धर्म को हानि पहुंचाएंगे ऐसी स्थिति में धर्म की रक्षा करने के लिए सत्व गुण स्वीकार करके स्वयं जगत के पालनहार भगवान विष्णु अवतार लेंगे| क्योंकि भगवान विष्णु जगत के पालन कर्ता है, सर्वव्यापी हैं, साधु है, सर्वशक्तिमान है, चराचर जगत गुरु हैं, वह साधु जन के धर्म की रक्षा के लिए, उनके जन्म मृत्यु के बंधन के जाल से छुड़ाने के लिए अवतार ग्रहण करते हैं और भगवान विष्णु कलयुग में कल्कि अवतार लेकर सारे जगत में फैले पाप के अंधकार को नाश कर धर्म की स्थापना करेंगे |

कल्कि अवतार का वर्णन 

श्रीमद्भागवत पुराण 

श्री सुखदेव जी कल्कि अवतार  के बारे में बताते हैं 

सुखदेव जी कहते हैं कलयुग में उन दिनों संबल ग्राम में विष्णु यश नामक ब्राह्मण होंगे | उनका हृदय सत्य और भक्ति से पूर्ण होगा , उन्हीं के घर भगवान कल्कि अवतार लेंगे | वे देवदत्त  नामक घोड़े पर सवार होंगे और भगवान कल्कि अपने दिव्य स्वरूप के साथ अधर्मियों  का अंत, पाप और असत्य को मिटाकर धर्म की रक्षा करेंगे | भगवान नारायण के कल्कि अवतार से यह धरती पावन हो उठेगी | 

उसके बाद श्री सुखदेव जी कलयुग के अंत के बाद सतयुग के प्रारम्भ की बात करते हैं | सुखदेव जी कहते हैं- प्रजा के नयन मनोहारी हरि ही धर्म के रक्षक और संसार के स्वामी हैं यही सर्वशक्तिमान है यही सर्वगुण है भगवान जब कल्कि  के रूप में अवतार लेंगे उसी समय सतयुग का प्रारंभ हो जाएगा और प्रजा की संतान परंपरा स्वयं ही सत्व गुण से युक्त हो जाएगी जिस समय चंद्रमा सूर्य बृहस्पति एक ही समय पुष्प नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश करके एक राशि पर आते हैं उसी समय सतयुग का प्रारंभ होगा भगवान के कल्कि अवतार के तुरंत ही सत्य युग का प्रारंभ हो जाएगा |

भगवान कल्कि का अवतार कब होगा श्रीमद भगवत पुराण से भगवान कल्कि का अवतार कलयुग के अंत समय में होगा | यह अवतार कलयुग वेद पुराण के अनुसार कलयुग 432000 वर्ष का है और 5100 वर्ष बीत चुके हैं अब से 426900 वर्ष के लगभग भगवान कल्कि का अवतार होगा | भगवान कल्कि के अवतार के बाद पापा धर्म और हिंसा का नाश हो जाने पर इस पृथ्वी पर सत्य और मानवता फिर से स्थापित करेंगे पृथ्वी फिर से सुरक्षा और शांति से आनंदित हो उठेगी तब एक नया युग होगा जिसे कहा जाएगा  सतयुग |

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