Fundamental Rights In Hindi | मौलिक अधिकार का अर्थ, प्रकार और महत्व |

Fundamental Rights In Hindi | मौलिक अधिकार 

का अर्थ, प्रकार और महत्व |

Fundamental Rights In Hindi | मौलिक अधिकार का अर्थ, प्रकार और महत्व | हर व्यक्ति को समाज में स्वाभिमान पूर्वक जीवन जीने के लिए कुछ अधिकारों के जरूरत होती हैं | भारतीय संविधान में भारत के प्रत्येक नागरिक चाहे वह किसी भी धर्म, संप्रदाय, जाति का हो समान अधिकार दिये गए हैं |

Fundamental Rights In Hindi | मौलिक अधिकार का अर्थ, प्रकार और महत्व |
Fundamental Rights In Hindi | मौलिक अधिकार का अर्थ, प्रकार और महत्व |

समाज में स्वाभिमान पूर्वक जीवन जीने और अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए इन अधिकारों का विशेष महत्व हैं | इन अधिकारों के बिना व्यक्ति समाज में अपनी जगह नहीं बना सकता | उसके जीवन में इन अधिकारों का विशेष महत्व हैं |

मौलिक अधिकार का अर्थ क्या होता है? (Meaning of Fundamental Rights in hindi)

मौलिक अधिकार का अर्थ | मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) वे अधिकार होते हैं जो कि किसी व्यक्ति के चहुमुखी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं | ये अधिकार किसी भी व्यक्ति के पूर्ण विकाश के लिए अति आवश्यक होते हैं | इन अधिकारों से ही व्यक्ति स्वतंत्र होकर अपना जीवन व्यापन कर सकता हैं और अपनी जरूरतों को पूरा कर सकता हैं |

हमारे मौलिक अधिकार कौन कौन से हैं? (Types of Fundamental Rights in Hindi)

भारतीय संविधान में भारत के सभी व्यक्तियों के लिए कुछ मौलिक अधिकार निर्धारित किए गए हैं | ये मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बल्कि भारत के प्रत्येक निवाशी के लिए हैं | इन अधिकारों को कोई भी नहीं छिन सकता | ये अधिकार सभी व्यक्ति (चाहे वह किसी भी धर्म को मानने वाला हो, देश के किसी भी कोने में रहता हो, गरीब हो या धनवान ) को समान रूप से प्राप्त हैं |

  • समानता का अधिकार
  • स्वतंत्रता का अधिकार
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
  • संस्कृति व शिक्षा का अधिकार
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार

समानता का अधिकार क्या है

समानता का अधिकार मौलिक अधिकारों में से एक हैं | इस अधिकार से अर्थ यह है कि भारतीय संविधान और कानून की दृष्टि में प्रत्येक नागरिक एक समान है | किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, जन्म स्थान, आर्थिक स्थिति आदि को लेकर किसी भी प्रकार का भेद भाव न हो | इसके साथ ही अस्पृश्यता (छूआ-छूत) जैसी रूढ़िवादी परंपरा का भी अंत हुआ है |

किसी भी प्रकार के सरकारी या गैर सरकारी पदों पर बिना किसी भेद भाव के समान रूप से भर्ती ली जाती है | समाज में उच-नीच का भेदभाव भी समाप्त हुआ है |

स्वतंत्रता का अधिकार क्या है

स्वतंत्रता का अधिकार सभी व्यक्ति को बिना किसी किसी रोक टोक के संविधान के दायरे में रहकर स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार देता है | कानून के दायरे में रहकर प्रत्येक नागरिक अपने इच्छानुसार अपना व्यापार स्थापित कर सकता है, संपत्ति रख सकता है, शांति पूर्ण तरीके से सभा और सामाजिक आयोजन कर सकता है, देश में कई भी आ-जा सकता है किसी भी विषय पर अपनी बात रख सकता हैं |

शोषण के विरुद्ध अधिकार का महत्व

शोषण के विरुद्ध अधिकार से दासता का अंत हुआ है | बाल मजदूरी पर रोक लगी है | अगर किसी व्यक्ति या समुदाय पर कोई अन्य व्यक्ति या समुदाय द्वारा जुर्म किया जाता है या उनका शोषण करता है तो उसे न्यायालय में जाने का और न्याय पाने का अधिकार है |

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार क्या है

देश में अलग अलग धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं | धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार उन्हे अपने अपने धर्मों का पालन करने और धार्मिक आयोजन करने का अधिकार देता है |

संस्कृति व शिक्षा का अधिकार

भारत जैसे विशाल देश में कई भाषाएँ बोली जाति हैं, कई अल्पसंख्यक समुदाय निवाश करते हैं | संस्कृति व शिक्षा का अधिकार से सभी को ये अधिकार हैं वे अपनी संस्कृति, धर्म को अपना सकते है तथा उसका प्रचार कर सकते हैं |

संवैधानिक उपचारों का अधिकार

संवैधानिक उपचारों का अधिकार, इस अधिकार से व्यक्ति अपने अधिकारों का किसी भी प्रकार से हनन महशुस करने पर न्यायालय में जाकर अपनी बात रख सकता है | व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का सरंक्षण उच्चतम न्यायालय ( Supreme Court) और उच्च न्यायालय (High Court) करता है |

मौलिक अधिकार क्यों जरूरी है? (Why are Fundamental Rights important?)

मौलिक अधिकार क्यों जरूरी हैं ? मौलिक अधिकार किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी होते हैं | अगर हमें स्वाभिमान पूर्वक और स्वतंत्र रूप से जीवन जीना हैं जिसमें किसी का कोई हस्तक्षेप न हो उसके लिए हमें स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया हैं जो कि अति आवश्यक हैं | उसी तरह हम अपनी इच्छानुसार किसी भी धर्म को मान सकता हैं | इसके लिए संविधान ने प्रत्येक व्यक्ति को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया है |

व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकाश के लिए शिक्षा का भी विशेष महत्व जिसके लिए संविधान ने संस्कृति और शिक्षा का अधिकार दिया हैं | हर व्यक्ति को बिना किसी भेद भाव के समाज में गौरवपूर्ण जीवन जीने के लिए, अपनी अलग पहचान बनाने के लिए समानता का अधिकार प्राप्त हैं |

कोई धनवान या ताकतवर व्यक्ति किसी निर्धन व कमजोर व्यक्ति पर दबाव बनाकर उसका शोषण न कर सके उसके लिए संविधान ने हर व्यक्ति को शोषण के विरुद्ध अधिकार प्रदान किए हैं | इसके अतिरिक्त व्यक्ति के लिए आवश्यक सभी सवैधानिक अधिकार हर नागरिक के आवश्यक है |

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